स्थापना 1963

ज्ञान का प्रकाश जगाएं

प्रज्वलितो ज्ञानमयः प्रदीपः

1963 से शिक्षा, संस्कृति और सेवा के लिए समर्पित

प्रेरणास्रोत

श्री राम पंचायतन

श्री राम पंचायतन

हमारे परिसर का आध्यात्मिक हृदय
श्रीमती नरसम्मा हिरय्या

श्रीमती नरसम्मा हिरय्या

ट्रस्ट की प्रेरणाशक्ति

जिनके नाम पर यह ट्रस्ट स्थापित है, उनकी स्मृति में शिक्षा की अलख जलाई जा रही है।

श्रीमती नरसम्मा हिरय्या शैक्षणिक ट्रस्ट

श्रीमती नरसम्मा हिरय्या शैक्षणिक ट्रस्ट शिक्षा, संस्कृति और समाज सेवा के क्षेत्र में कार्यरत अग्रणी संस्था है। स्वर्गीय श्रीमती नरसम्मा हिरय्या मन्नेवार (Smt. Narsamma Hirayya Mannewar) की उदार दृष्टि से स्थापित, जिन्होंने शैक्षणिक उद्देश्य के लिए 12 एकड़ भूमि दान की। इसी दृष्टि और स्वप्न को साकार करते हुए हमारी संस्था एक व्यापक शैक्षिक परिसर के रूप में विकसित हुई है। आज, हम गर्व से एक शैक्षणिक केंद्र के रूप में सेवा कर रहे हैं जो पारंपरिक भारतीय मूल्यों को आधुनिक शैक्षिक प्रथाओं के साथ सहजता से जोड़ता है, प्राथमिक विद्यालय से लेकर उन्नत शोध अवसरों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है।

हमारा मिशन

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सांस्कृतिक संवर्धन और समाज सेवा के माध्यम से समाज के सभी वर्गों का उत्थान करना।

हमारी दृष्टि

एक ऐसा समाज बनाना जहाँ हर व्यक्ति को शिक्षा का समान अवसर मिले और भारतीय संस्कृति जीवित रहे।

हमारे मूल्य

सत्य, सेवा, शिक्षा और संस्कृति — ये चार स्तंभ हमारे ट्रस्ट की आत्मा हैं।

चंद्रशेखर ए. भोंदू

चंद्रशेखर ए. भोंदू

अध्यक्ष

यह मेरे लिए अत्यंत गर्व और गहन जिम्मेदारी की बात है कि मैं आपको श्रीमती नरसम्मा हिरय्या शैक्षणिक ट्रस्ट में आपका स्वागत करता हूँ। 1963 में हमारी स्थापना के बाद से, हमारी यात्रा एक ही पवित्र दृष्टि से निर्देशित रही है: ज्ञान के दीपक से जीवन को प्रकाशित करना, जैसा कि हमारे आदर्श वाक्य "प्रज्वलितो ज्ञानमयः प्रदीपः" में निहित है। हमारी नींव हमारी संस्थापक, श्रीमती नरसम्मा हिरय्या मन्नेवार के असाधारण बलिदान पर बनी है। एक निरक्षर महिला, जिनके पास असाधारण दूरदृष्टि थी, उन्होंने 12 एकड़ प्रमुख भूमि इस दृढ़ विश्वास के साथ दान की कि शिक्षा सबसे बड़ी समानता है। उनकी एकमात्र शर्त—परिसर में श्री राम पंचायतन मंदिर का निर्माण—उनकी गहन समझ को दर्शाती है कि सच्ची शिक्षा सांस्कृतिक मूल्यों और नैतिक सत्यनिष्ठा में निहित होनी चाहिए। आज, जब हम प्राथमिक विद्यालय से लेकर उन्नत शोध तक हजारों छात्रों की सेवा करने वाले एक व्यापक शैक्षिक परिसर के रूप में खड़े हैं, हम उनकी दृष्टि के प्रति प्रतिबद्ध हैं। हमारा मिशन तीन गुना है: पारंपरिक भारतीय मूल्यों को अत्याधुनिक तकनीक के साथ सामंजस्य स्थापित करना, पर्यावरण की रक्षा करने वाली टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देना, और समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाने वाले अवसर पैदा करना। भविष्य की ओर देखते हुए, हमारा संकल्प और मजबूत होता जा रहा है। हमें दो परिवर्तनकारी आगामी परियोजनाओं की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है। स्वर्गीय श्री गजाननराव रहाटगांवकर स्मारक सभागार, एक अत्याधुनिक 450 सीटों वाली सौर ऊर्जा संचालित सुविधा, दिसंबर 2026 तक पूरी होने वाली है। इसमें भारतीय ज्ञान अभ्यासिक (भारतीय ज्ञान केंद्र), एक प्रतियोगी परीक्षा तैयारी केंद्र और एक कला गैलरी होगी। इसके अलावा, हम भारत का पहला मराठी-माध्यम CBSE स्कूल, नवभारत गुरुकुलम स्थापित करने के एक महत्वाकांक्षी उपक्रम की शुरुआत कर रहे हैं, जो 2027-28 शैक्षणिक वर्ष में शुरू होगा। यह संस्थान पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक STEM विषयों, जिनमें AI, रोबोटिक्स और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी शामिल हैं, के साथ अनूठे ढंग से जोड़ेगा। मैं आपको केवल सफल करियर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रबोध, जिम्मेदार और सांस्कृतिक रूप से जुड़े नागरिकों को आकार देने की इस पवित्र यात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता हूँ। आइए, मिलकर एक ऐसा शैक्षिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाएं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सांस्कृतिक प्रकाश स्तंभ के रूप में कार्य करे।

पंच परिवर्तन

समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के पंचपरिवर्तन की अवधारणा हम स्वीकारते हैं, और इनपर चलने का संकल्प करते हैं। ये पांच प्रमुख आयाम इस प्रकार हैं:

  • स्व का बोध (स्वदेशी) अपनी भाषा, भूषा, भोजन, भजन, भवन और भ्रमण में भारतीय संस्कृति को अपनाना और स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करना।
  • कुटुम्ब प्रबोधन परिवार के साथ समय बिताना, पारिवारिक मूल्यों को बचाना और बच्चों में अच्छे संस्कार डालना।
  • सामाजिक समरसता जाति, वर्ग या भाषा के भेद को मिटाकर समाज में आपसी प्रेम, समानता और सद्भाव बढ़ाना।
  • पर्यावरण संरक्षण पेड़ लगाना, पानी बचाना और प्लास्टिक का उपयोग कम करके प्रकृति की रक्षा करना।
  • नागरिक कर्तव्य देश के कानूनों का पालन करना, यातायात के नियमों का सम्मान करना और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को पूरा करना।
GAIL (India) Ltd. 80 किलो वाट सोलर सिस्टम के दाता

परिसर की विशेषताएँ

10 एकड़ में फैला हमारा परिसर आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं, खुले खेल मैदानों और हरित पहलों का संगम है।

शैक्षणिक अधोसंरचना
शैक्षणिक अधोसंरचना

हमारे 10 एकड़ के परिसर में 27,000 वर्ग फुट की आधुनिक शैक्षणिक अधोसंरचना है, जिसे सर्वोत्तम शिक्षण अनुभव के लिए तैयार किया गया है। इन सुविधाओं में कक्षाएँ, प्रयोगशालाएँ, शोध केंद्र, उन्नत विज्ञान एवं कंप्यूटर प्रयोगशालाएँ तथा पुस्तकालय शामिल हैं। हमारा परिसर प्लास्टिक-मुक्त वातावरण, कागज़ के पुनः उपयोग, वर्षा जल संरक्षण, कार्बन फुटप्रिंट घटाने हेतु सौर ऊर्जा के उपयोग तथा हरित एवं सतत ऊर्जा के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित करता है।

खेल सुविधाएँ
खेल सुविधाएँ

खेल-कूद सुविधाओं को बढ़ाने के लिए हमने नरसम्मा क्रीड़ा समिति की स्थापना की है। हम अपने विद्यार्थियों तथा परिसर के आसपास के समाज में खेल-कूद को प्रोत्साहित करते हैं। मैदान तथा वॉकिंग एवं रनिंग ट्रैक परिसर के आसपास के लोगों के लिए खुले हैं और इनका उपयोग निःशुल्क है।

हरित एवं सतत पहल
हरित एवं सतत पहल

पर्यावरण संरक्षण हमारे परिसर संचालन का मूल सिद्धांत है, जिसका उदाहरण हमारा 105 kW का रूफटॉप सोलर प्लांट है, जिसमें से 80 kW गेल इंडिया द्वारा दान किया गया है। 30 सौर ऊर्जा चालित स्ट्रीटलाइट्स के साथ यह संयंत्र स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करता है। पूरे परिसर में हम सख्त प्लास्टिक-मुक्त नीति का पालन करते हैं और विद्यार्थियों को प्लास्टिक के ज़िम्मेदार उपयोग के प्रति संवेदनशील बनाया जाता है। हमारे कागज़ पुनः उपयोग कार्यक्रम को विशेष सफलता मिली है, जिसकी सराहना NAAC तथा अन्य प्राधिकरणों ने की है। ये सभी पहलें मिलकर हमें हरित परिसर के रूप में पहचान दिलाती हैं और विद्यार्थियों के लिए सततता के व्यावहारिक पाठ बनती हैं।

सहयोगी संगठन

  • अखिल भारतीय विद्या भारती संगठन
  • हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड
  • गेल (इंडिया) लिमिटेड
  • झंडू इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड
  • वॉटर इंजीनियर्स (इंडिया) प्रा. लि.

हमारी यात्रा में शामिल हों

आपका सहयोग हजारों विद्यार्थियों का भविष्य उज्जवल कर सकता है।